इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आगरा में छात्रा की जलाकर हत्या के मामले में दोषसिद्ध अभियुक्त की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट का फैसले बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि छात्रा का मृत्यु पूर्व बयान विश्वसनीय है और उसके आधार पर सजा दी जा सकती है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय व न्यायमूर्ति डॉ. अजय कुमार की खंडपीठ ने अभियुक्त आशीष उर्फ आशिक की अपील खारिज करते हुए दिया है। वर्ष 2008 में 16 वर्षीय छात्रा को अभियुक्त ने तेल डालकर जला दिया था।

गंभीर रूप से झुलसी विनीता की घटना के लगभग 12 घंटे बाद मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि डाक्टर ने बयान से पहले और बाद में प्रमाणित किया कि पीड़िता पूरी तरह होश में थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चेहरे या सिर पर कोई गंभीर जलन नहीं पाई गई।

कहीं भी यह साबित नहीं हुआ कि पीड़िता बयान देने के लिए मानसिक रूप से अयोग्य थी। कोर्ट ने माना कि छात्रा का मृत्यु पूर्व बयान संक्षिप्त, स्पष्ट और विश्वसनीय है, जिसमें उसने सीधे तौर पर अभियुक्त का नाम लिया है। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने घटना के समय, स्थान और तरीके की पुष्टि की।

चिकित्सीय साक्ष्य से साबित हुआ कि मौत अत्यधिक जलने और शाक के कारण हुई। घटनास्थल से प्लास्टिक कंटेनर और जली हुई चटाई भी बरामद हुई।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एफआईआर में दर्ज आशिक और मृत्यु पूर्व बयान में नामजद आशीष एक ही व्यक्ति है। बचाव पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि कोई अन्य व्यक्ति आरोपित था। कोर्ट ने कहा कि किसी को जिंदा जलाना अत्यंत क्रूर और जघन्य अपराध है।

आरोपित को अपने कृत्य के परिणाम का पूरा ज्ञान था। इसलिए ऐसे मामलों में कड़ी सजा जरूरी है ताकि समाज में निवारक प्रभाव पड़े। कोर्ट ने आइपीसी की धारा 304 भाग एक के तहत दी गई उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने को सही ठहराया।

साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सजा में छूट पर दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाए क्योंकि अभियुक्त 17 साल से अधिक समय से जेल में है।

Source link

Picture Source :